ऋतु बदलने सी लगी

अब अचानक ऋतु बदलने सी लगी
ठंड का अहसास सा होने लगा
प्यार की बारिश में उगती ख्वाहिशें
पड़ न जाएं ठंड में पाले के पाले।

Comments

11 responses to “ऋतु बदलने सी लगी”

  1. बहुत खूब, बरसात की ऋतु जा रही है, ठंडक की ऋतु आ रही है। waah

    1. बहुत धन्यवाद

  2. बहुत सुंदर, लाजवाब।लिखा है सर

  3. बहुत खूब, बहुत बढ़िया

    1. धन्यवाद जी

  4. बहुत ही सुन्दर कविता

  5. Geeta kumari

    पड़ ना जाएं ठंड में पाले के पाले….वाह सर यमक अलंकार के सुंदर प्रयोग से परिपूर्ण अति सुंदर कविता ।

  6. वाह वाह क्या बात है

  7. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति

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