मानवता पर प्रहार कर रहे
बेटियों पर अत्याचार कर रहे
राक्षसों को मिटाने के लिए
अवतार का इंतजार नहीं करना है,
बल्कि जोरदार मुहिम चलानी है,
कुकर्मियों को नानी याद दिलानी है,
बुरी नजर को मसल कर रख देना है
दुराचार को बर्दाश्त नहीं करना है।
बहुत हो चुका, बस बहुत हो चुका
देश की सत्ता तुझे कड़े नियम बनाने हैं
दुराचारियों का शिकार न बनें बेटियां
अब तुझे धरातल पर डंडे चलाने हैं।
राक्षसों को मिटाने के लिए
Comments
17 responses to “राक्षसों को मिटाने के लिए”
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वाह बहुत खूब, अत्यंत समसामयिक रचना। जबरदस्त शैली में। wow great
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बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत ही प्रभावशाली पंक्तियाँ। शानदार पंक्तियाँ, बात ही निराली है।
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भाव दबाते दबाते मुखर हो ही गए, संज्ञान ग्रहण करने हेतु, हार्दिक धन्यवाद
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अतिसुंदर भाव अतिसुंदर रचना
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सादर नमस्कार और धन्यवाद शास्त्री जी
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“जोरदार मुहिम चलनी है, कुकर्मियों को नानी याद दिलानी है।👏👏
सच कहा आपने सतीश जी, मुहिम तो चलानी पड़ेगी।वरना भारत की बेटियों के भविष्य पर ये अनचाहा खतरा हमेशा ही मंडराता रहेगा ।माता पिता भी निश्चिन्त ना हो पाएंगे ।
बहुत उर्जावान और शानदार विचार और शानदार प्रस्तुति।
आपकी लेखनी को कोटि कोटि प्रणाम ।-
आपके द्वारा की गई इस सुंदर समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद। आपकी समीक्षा शक्ति अति प्रखर है। सादर अभिवादन।
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बहुत ही सुंदर लिखा है आपने, बहुत सुंदर। देश मे नई मुहिम की जरूरत है।
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सादर धन्यवाद जी
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सच्ची बात लिखी है आपने, बहुत सच्ची।
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सादर धन्यवाद
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बढ़िया कविता, बहुत ही बढ़िया
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बहुत बहुत धन्यवाद
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अतिसुन्दर पंक्तियाँ वाह वाह
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सादर धन्यवाद
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बहुत खूब
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