22 Comments

  1. वाह, बहुत सुंदर अभिव्यक्ति—-
    “कोई भाव कहे कविता के ,
    कोई सुंदर सखी मिली ।
    वो सुहाना स्वपन ही था,
    स्वपन -लोक की थी गली ।'”
    कवि की सकारात्मक और बेहतरीन कृति

  2. इतनी सुन्दर समीक्षा हेतु धन्यवाद शब्द कम पड़ रहा है सर..
    🙏 आपका हार्दिक धन्यवाद एवम् आभार ।

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