11 Comments

  1. अत्यंत सच्ची और यथार्थ से जुड़ी अभिव्यक्ति।
    मेरी आत्मा मरी नहीं
    जला है सिर्फ रूप ही
    जीने के मायने बदल गये
    हौंसलों ने संवार दी जिंदगी।
    मार्मिक अनुभूति

  2. उफ्फ, एसिड अटैक पीड़ित बहनों का दर्द उड़ेल दिया है
    कागज़ पर तुमने प्रज्ञा
    वो इंसान नहीं दरिंदा ही होगा, एक इंसान तो ऐसा सोच भी नहीं सकता ।
    बहुत ही मार्मिक रचना और उसकी बहुत भावुक प्रस्तुति

  3. ईंट के जवाब पत्थर से देना ए नारी तुम कब सिखोगी।
    कब तुम अपनी दसवां रुप, इस ज़माने को दिखाओगी।।

    1. धन्यवाद सर..
      दिखा सकती हूं दसवां रूप बात यह है कि ऐसे लोगों की भेंट मुझसे नहीं हुई वरना मुह की ही खानी पड़ती

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