आ ! मेरे पास आ ,
ओ री ! नींद,
तुम्हें मैं लोरी सुनाता हूं ,
मुझे तो तुम सुलाती नहीं,
चल मैं तुझे सुलाता हूं।
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ओ री!नींद
Comments
6 responses to “ओ री!नींद”
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बहुत खूब
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सादर आभार
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खूब
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सादर धन्यवाद
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अलग खयाल के साथ सुंदर रचना
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बहुत बहुत आभार
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