15 Comments

  1. तो नचाएगा यह जमाना…
    हे प्रभु, कभी किसी को किसी की कठपुतली न बनाना।।
    —- कवि गीता जी की बहुत सुंदर रचना। बहुत सत्य कहा है आपने, उत्तम रचना

  2. अपनी किरदार निभाने ही पड़ेंगे
    जो लिखा हैं वो होना ही हैं
    सब मौन ना हो सकते जहां में
    कुछ कोलाहल भी जरूरी हैं
    रचना विकास कुमार

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