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  1. मक्कार है बाजार ये ना माँ का ना बाप का ,
    डूबोगे तब हंसेगा धिक्कार के साथ ।
    _________ सच्चाई व्यक्त करती हुई कवि अजय अमिताभ जी की बहुत सुंदर रचना

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