कर्मफल

स्वप्नों के बीज पर ही कर्म फल लगते हैं
स्वप्न सीढ़ियों पर चढ लक्ष्य के फल चखते हैं ।
बगैर स्वप्न देखे कहाँ हम आगे बढ़ते हैं
बगैर इसके कहाँ उपलब्धियाँ हासिल करते हैं ।
कल्पना ही है वह आधार भूमि
लक्ष्य इमारतों की बुनियाद जिसपर रखी होती हैं
जीजिविषा के दम पर ही मन साकारता को पाती हैं
हर नवनिर्माण के पीछे चेतना संघर्ष करते हैं
स्वप्न के बीज पर ही कर्म फल लगते हैं ।
हमारा व्यक्तित्व सशक्त स्वप्न की पहचान है
हमारी पायी गयी मंजिल हमारे अरमान हैं
स्वप्न हमारी हर आनेवाली समस्या का समाधान है
इसके बल पर आत्मविश्वास को उङान देते हैं
स्वप्न के बीज पर ही कर्म लगते हैं ।

Comments

18 responses to “कर्मफल”

  1. बहुत ही खूबसूरत लिखती हो आप

    1. Suman Kumari

      सादर आभार

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत ही बेहतरीन
    शायद ! स्वप्न का प्रयोग यहां इच्छाओं और अभिलाषाओं के लिए हुआ है।
    सुन्दर भाव

  3. Suman Kumari

    जी हाँ ।

  4. Suman Kumari

    बहुत बहुत धन्यवाद

  5. Satish Pandey

    भाषा, शिल्प और संवेदना जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर निखरती सुन्दर रचना, वाह

  6. Suman Kumari

    सादर आभार ।

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  7. Geeta kumari

    सुंदर रचना

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  8. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बहुत खूब सुंदर भाव

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद सर

  9. सुंदर काव्य चित्रण

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  10. सुन्दर भाव

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  11. बेहतरीन प्रस्तुति

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