कविता (स्वतंत्रता दिवस प्रतियोगिता)

झांक हमारे अंदर लहू है, पानी नहीं।
आज़मा कर देख, हम किसी से कम नहीं
क्यों इतराता है, तू अपनी ताक़त पे।
गर आज हम नहीं, तो कल तू भी नहीं।।
अपना हक़, सिन्हा चीर कर ले लेंगे हम।
झुका दे मुझे , तुझ में इतना दम नहीं।।
गर गिर गये हम तो, संभलना जानते हैं।
हम से है जमाना , जमाने से हम नहीं।।
यही मिट्टी मांगा था , कभी लाल लहू।
लहू से सिंचे है भारत को, पानी से नहीं।।
मेरे वतन पे, बुरी नज़र रखने वाले।
धूल न चटा दूं तो हम भी, वतन के सपूत नहीं।।
तिरंगा मेरी आन बान शान के प्रतीक है।
संभल जा देश द्रोही, अब तेरा खैर नहीं।।
मिट्टी के कण कण में , लिखा है हमारे देश के नाम।
वक्त आने पर आगे बढेंगे, पिछे कभी हटेंगे नहीं।।

Comments

12 responses to “कविता (स्वतंत्रता दिवस प्रतियोगिता)”

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद।

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद।

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया।

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया।

  1. Praduman Amit

    शुक्रिया।

    1. Praduman Amit

      Thanks

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