कस्तूरी

इश्क़ और मुश्क में
इश्क़ तो सभी जानें
और मुश्क ??
इसका क्या अर्थ है
मुश्क मतलब है कस्तूरी
कस्तूरी हिरण की नाभि में है
फिर भी इधर उधर भागे वो
कहां से आई है ये सुगंधि,
उसके ही अंदर है
ये भी ना जाने वो
घूमे इधर-उधर होकर दीवाना
यह सुगंधि उसके अंदर है
यह भी ना वो पहचाना
भागता है दौड़ता है
कभी-कभी करता है अहित अपना
निशा के अंधेरे से लेकर
जब तक हो ऊषा का उजाला
कस्तूरी मृग कस्तूरी की सुगंधि से ही
हैरान, परेशान हुआ मतवाला
_______✍️गीता

Comments

8 responses to “कस्तूरी”

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी🙏

  1. कमाल की रचना

    1. आभार पीयूष जी

  2. Anu Singla

    Beautiful

  3. सुंदर भाव

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

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