काश तुम चले आते! By Panna Posted on September 4, 2015November 26, 2018 Category : हिन्दी-उर्दू कविता चली आतीं है अक्सर यादें तुम्हारी मगर तुम नहीं आते की कोशिश कई दफ़ा भूल जाने की तुम्हे मगर भूल नहीं पाते आयीं राते पूनम की कई बार मगर न हुआ चांद का दीदार कर दिया है हमने अंधेरा अपने आशियाने में हम उजाला अब सह नहीं पाते काश तुम चले आते | poetry with pannasaavan
Nice lines
dhanyavaad dost
Good
बहुत सुंदर, बहुत खूब