किधर जाऊँगा

मत निकाल अपने दिल से मुझे,
मैं तो वक्त हूँ, गुज़र जाऊँगा
इस भरे शहर में कोई आशना नही,
ये जगह भी गई तो किधर जाऊँगा ?

मायने :
आशना – परिचित

Comments

7 responses to “किधर जाऊँगा”

  1. बहुत ख़ूब

  2. अतिसुन्दर

    1. धन्यवाद आपका

    1. Prayag Dharmani

      🙏🙏

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