किये पे रोना ही पड़ेगा
मायूस मन नीचे गिरायेगा ही,
झूठ का साथ देना है आसान
पर मुश्किल घड़ी में सच ही आयेगा काम ।।1।।
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क्यूँ करते हो गलत काम
जब सच ही आयेंगे काम
छोड़ो झूठ अब तो
सच अपनालो आज तो ।।2।।
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जल गई होलिका झूठ की आग में,
निखर गया प्रहलाद सच के प्रभाव से,
हिरण्यकश्यप मर गया झूठी शान में,
जीतता आया है सच झूठों के चक्रव्यूह से ।।3।।
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कोई अब तो मत मनाओ ऐसी होली
कि तुम्हारे चुल्ही पे चढ़े निर्दोषों की बलि
झूठी की शान नही,
सच की जीत का त्योहार है यह होली ।।4।।
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मनाओ होली खाकर मिष्ठान्न
और भूलो भूली-बिसरी बात
गले मिलकर करो एक-दूसरों से मीठी बात
मनाओ होली खाकरग मिष्ठान्न ।।5।।
जय श्री सीताराम
किये पे रोना ही पड़ेगा
Comments
3 responses to “किये पे रोना ही पड़ेगा”
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वाह
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बहुत ही सुंदर भावाभिव्यक्ति
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क्यूँ करते हो गलत काम
जब सच ही आयेंगे काम
छोड़ो झूठ अब तो
सच अपनालो आज तो
______’___ सच्चाई की राह पकड़ चलने को प्रेरित करती हुई कवि विकास जी बहुत सुंदर रचना ,अति सुंदर अभिव्यक्ति जय श्री राम
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