16 Comments

  1. वाह ,सतीश जी आपने बहुत ही ख़ूबसूरत तरीके से शायद टेलीपैथी का ज़िक्र किया है अपनी कविता में । बहुत सुन्दर प्रस्तुति है सर ,काबिले तारीफ़..

    1. आपकी विद्वता को सलाम है। एक विद्वान व्यक्तित्व भाव को तुरंत पकड़ लेता है, ज्ञान का उच्च स्तर परिलक्षित हो रहा है आपमें, तभी आपने टेलीपैथी को तुरंत भांप लिया। बहुत खूब,
      जय हो, प्रखरता बनी रहे।

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