कुछ इस तरह चला;
यू मोहब्बत का सिलसिला,
ना तुमको इसका एहसास था,
ना मुझको इसका गम,
हम दोनों मसरूफ रहे,
इसे बेवजह निभाने में।
कुछ इस तरह चला…
Comments
8 responses to “कुछ इस तरह चला…”
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सुंदर
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धन्यवाद सर
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बहुत ही अच्छी
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धन्यवाद
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बहुत ही उम्दा
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धन्यवाद
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सुन्दर
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धन्यवाद
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