कुण्डलिया नारी वंदना

नारी के सब रूप को, वंदन बारंबार
जो करती सत्कर्म से, दोनों कुल उजियार
दोनों कुल उजियार, सती श्री वीणापाणी
ममता करुणा मूर्ति, जगत की है कल्याणी
कह पाठक कविराय, आरती करे तुम्हारी
हरण करो अग्यान, बचाओ जग को नारी

Comments

5 responses to “कुण्डलिया नारी वंदना”

  1. Ekta

    उत्कृष्ट रचना

  2. Pragya

    Beautiful poem

  3. नारी की पूजा को महत्ता देती तथा नारी के महत्व को समझाते सुंदर पंक्तियां

  4. waah, waah, बहुत खूब

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