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  1. बहुत ही सुन्दर विचार प्रस्तुत किए हैं प्रज्ञा आपने अपनी कविता के माध्यम से ।सच ही है कुर्बानी कुत्सित विचारों की करनी चाहिए ना कि बेजुबान मासूम जानवर की, इससे कौन सा ख़ुदा खुश होता होगा भला
    “क्षुधा मिटाने की खातिर कुदरत ने फल-फूल बनाए हैं,
    फ़िर पशुओं को क्यूं मारा जाए, वो भी तो कुदरत से आए हैं” ।
    बहुत सुंदर शिल्प, लय बद्ध शैली और बहुत सुन्दर विचारों से सुसज्जित बहुत संवेदनशील रचना ।

  2. मांस मदिरा सेवन करे जो लंपट में समय बीताता है।
    वही आदमी पहला नंबर कुंभकर्ण में आता है।।

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