कुर्सी क्या है?

कुर्सी क्या है ?
कितना मुश्किल है इसे समझना।
सब राजनीति की संरचना है,
सुन रखे हैं पुराने वादें,
अब नए वादों में फंसना है।
ये तो कुर्सी का मसला है।
कहीं सत्ता की चाल है ,
कहीं कुर्सी का दाव है।
फिर से,
दो कुर्सियां आपस में जा टकराई।
जो बच गयी ,
वो कुर्सी फिर सत्ता में आई।
आम जनता; आम ही रह गई।
जो ना बदली , वो बदल ना पाई।
अब क्या करें !
भगवान भरोसे सब
रख छोड़ा है ,
सब ने कुर्सी से नाता जोड़ा हैं,
जनकल्याण के नारे,
किताबों में ही अच्छे लगते हैं,
अब रोज़ यहां बड़े चाव से,
कुर्सी के नारे लगते है।

Comments

18 responses to “कुर्सी क्या है?”

  1. Praduman Amit

    राजनीति पर निर्मित कविता तारीफ़ ए क़ाबिल है।

  2. Geeta kumari

    Very True

    1. Pratima chaudhary

      Thank you

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    राजनीति व राजनेताओं के सच को सामने लाती बहुत सुंदर कविता

  4. Pratima chaudhary

    बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  5. Aditya Kumar

    अद्भुत

    1. Pratima chaudhary

      Thank you

  6. Deep Patel

    सत्य वचन

  7. अत्यंत प्रिय

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