चंद लम्हो की ज़िन्दगी में अब और क्या- क्या होना है
ब्रष्टाचार क्या कम था जो आगया कोरोना है
गरीब खा रहे मांगके और अमीरो के पास सोना है
मिडिल क्लास की किस्मत में तो रोना ही रोना है
इस परेशानी में पूरा जाहां है रो दिया
कितनो ने अपने परिवार को है खो दिया
सारे देशो में ये लॉकडाउन है शुरू हो गए
जो जहा थे वो वही है रुक गए
घर जाते वक़्त कुछ रस्ते में ही मर गए
और घरवाले है की घर में बैठे बैठे थक गए
फिर भी इरादों में कमी नहीं लाएंगे
नियम पालन कर इसको हम हराएंगे
विदेशी को छोड़ अपनी संस्कृति अपनाएंगे
जोड़ लेंगे हाथ पर हाथ नहीं मिलाएंगे
वक़्त- वक़्त पर हाथ हम धोते जायेंगे
बहार जाते वक़्त मास्क पहन जायेंगे
किसी अज्ञात चीज़ को हाथ नहीं लगाएंगे
सुनो डॉक्टर, पुलिस तुमसे कुछ कह रहे
बहार रहकर सबकी रक्षा है ये कर रहे
अपनी जानपर खेलकर इस बीमारी से लड़ रहे
निकलो मत घर से सबको है ये कह रहे
बरतो सावधानी डरो मत सबको ये बता रहे
पूरी कोशिश करके बीमारी को जड़ से है ये मिटा रहे
यह सुनके पूरा देश बोले आज
में भी इनका साथ दूंगा
ये जो बोले उस नियम का पालन करूँगा
रहकर घर पे अपनी और अपने देश वासियो की रक्षा करूँगा
हम देश वासियो को अब साथ मिलकर चलना है
चंद लम्हो की ज़िन्दगी में अब और क्या- क्या होना है
कोरोना
Comments
6 responses to “कोरोना”
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बहुत अच्छी रचना
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Khoob
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वाह
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👏👏
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Good
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good
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