क्या कहूँ!!
दिल में कितनी उदासी छाई है,
तेरी बेरुखी मेरी जान पर बन आयी है।
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मैं एक गुमशुदा सी शाम हूँ और,
तू मेरी रुसवाई है।
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इन तूफानों के आगे,
दिल में मीलों की खाईं है।
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समझ नहीं पाती हूँ मैं कभी-कभी,
ये तेरी मोहब्बत है या बेवफाई है।
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मेरे अश्कों से तेरा दिल नहीं पिघलता,
ओ ज़ालिम! तू कितना हरजाई है।
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क्या कहूँ!! ओ ज़ालिम
Comments
10 responses to “क्या कहूँ!! ओ ज़ालिम”
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Nice
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धन्यवाद
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Beautiful
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थैंक्स फॉर कमेंट्स
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वेलकम
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बहुत खूब।
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धन्यवाद
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वाह
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धन्यवाद
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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