क्या लीजिएगा

कहिए हुज़ूर और क्या लीजिएगा।
दिल तो ले चुके अब जाँ लीजिएगा।

तुम्हें हमसे मोहब्बत है या फिर नहीं,
फैसला जो भी लो बजा लीजिएगा।

मेरी ज़ुबाँ पर बस एक तेरा ही नाम,
नाम मेरा भी तेरी ज़ुबाँ लीजिएगा।

डूब ना जाऊँ कहीं गम के पैमाने में,
जाम आँखों से छलका लीजिएगा।

खो ना जाऊँ ज़हाँ की भीड़ में कहीं,
अपनी आगोश में समा लीजिएगा।

‘देव’ जीना मरना रख छोड़ा हाथ तेरे,
गर साथ जीना हो तो बचा लीजिएगा।

देवेश साखरे ‘देव’

बजा- ठीक,

Comments

21 responses to “क्या लीजिएगा”

  1. देर आये दुरुस्त आये

  2. अति सुंदरम

      1. वेलकम सर

  3. Amod Kumar Ray Avatar
    Amod Kumar Ray

    मस्त

  4. Abhishek kumar

    Superb

  5. Kanchan Dwivedi

    Nice

  6. Satish Pandey

    बहुत खूब, सुन्दर रचना

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