11 Comments

  1. मन में उठ रहे जज्बात, ठेस मिलने पर उपजी संवेदना, परिलक्षित हो रही है। भाव और लय का सुन्दर तारतम्य है।
    बहुत खूब लिखा है प्रज्ञा जी

  2. खिन्न हृदय के जज्बातों को बहुत ही खूबसूरती और लय बद्ध तरीके से बयां किया है, कवियित्री ने लेखनी में दम है भई ।

  3. सरल शब्दों में जीवन की पूर्णबंदी को उजागर करना
    सिर्फ आपसे ही ग्रहण किया जा सकता है

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