झड़ी लगा दूँगा यहाँ, लिख कर तुझ पर मीत,
प्यार मुहब्बत ही नहीं, दर्द भरे भी गीत,
दर्द भरे भी गीत, तुझे गाकर कह दूँगा,
फूल तोड़कर आज, यहाँ खुशबू ला दूँगा।
कहे लेखनी नई चाहना है उभर पड़ी।
इसीलिए तो बारिश, की उमड़ रही है झड़ी।
खुशबू ला दूँगा
Comments
10 responses to “खुशबू ला दूँगा”
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“झड़ी लगा दूँगा यहाँ, लिख कर तुझ पर मीत,
प्यार मुहब्बत ही नहीं, दर्द भरे भी गीत”
____इतनी सुंदर छंद युक्त रचना ,एक श्रेष्ठ कवि की लेखनी से ही निकल सकती है।,मोहब्बत के पैगाम देती हुई बहुत सुन्दर पंक्तियां-
शानदार समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी
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Vaah 👏👏 मोहब्बत का बांध ही तोड़ दिया अपनी रचना में 🙏
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धन्यवाद
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क्या बात है बहुत खूब लिखा है आपने
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सादर धन्यवाद
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बहुत ख़ूब
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सादर धन्यवाद
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वाह सतीश जी बहुत शानदार कविता
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बहुत धन्यवाद
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