हार गए
इसलिए उदास हो ना
खूब निराश हो ना
दिल टूट गया है ना
उत्साह रूठ गया है ना
सब तरफ से हताश हो ना,
हाथों में माथा टेककर
सोच रहे हो ना क्या करूँ
तो सुनो, सबसे पहले उदासी छोड़ो,
निराशा की कड़ी तोड़ो,
जीवन की दिशा को
आशा और उत्साह की तरफ मोड़ो।
जो हुआ सो हुआ,
अब करो दुआ
खुद के लिए भी
दूसरों के लिए भी।
ऐसे मथो माखन
कि उपजे सुगन्धित घी,
मन की हार है
अन्यथा कुछ नहीं है,
जन्म लेते समय कुछ नहीं लाये थे साथ,
तब क्या है हारने की बात।
समझ गए ना
तुम्हें निरुत्साह को है हराना,
जीवन का सच समझ कर
अपना मार्ग है बनाना।
खूब निराश हो ना
Comments
3 responses to “खूब निराश हो ना”
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तुम्हें निरुत्साह को है हराना,
जीवन का सच समझ कर
अपना मार्ग है बनाना।
___उत्साह को बनाए रखने हेतु बहुत सुन्दर पंक्तियां । उत्कृष्ट रचना और सुंदर शिल्प लिए हुए बहुत सुंदर कविता -
अतिसुंदर अभिव्यक्ति
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जन्म लेते समय कुछ नहीं लाए थे साथ ,
तब क्या है हारने की बात
समझ गए ना—–बहुत सुंदर रचना
निराशा में डूबे व्यक्ति को उत्साहित करते हुए अति सुंदर रचना
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