खोज रहा है आदमी

खोज रहा है आदमी, अपने को ही आज,
मगर नहीं हो पा रहा, होने का अहसास,
होने का अहसास, स्वयं मानव होने का,
लोभ लालसा हाय बनी कारण खोने का,
कहे कलम बेचैन मत रह तू मानव रोज,
कभी कभी तू सत्य की बातें मन में खोज।

Comments

10 responses to “खोज रहा है आदमी”

  1. Geeta kumari

    खोज रहा है आदमी, अपने को ही आज,
    मगर नहीं हो पा रहा, होने का अहसास,
    _______जीवन दर्शन के प्रति गहरी अनुभूति दर्शाती हुई, कवि सतीश जी की बहुत ही श्रेष्ठ एवम् उम्दा रचना।बहुत सुंदर शिल्प और अभिव्यक्ति

    1. क्या शानदार समीक्षा शक्ति है। तभी तो आप श्रेष्ठ समीक्षक हैं। जय हो

      1. Geeta kumari

        🙏🙏 सुस्वागतम्

  2. सही कहा…
    मनु तू खुद को पहचान ले
    खुदा खुद मिल जाएगा।

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  3. उत्तम विचार

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद

  4. Seema Chaudhary

    छंद युक्त बहुत उत्तम रचना

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  5. Anurag Singh

    बहुत ख़ूब सुन्दर विचारों वाली छंद शैली में सुंदर कविता

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