गठबंधन

तीन छात्र थे केवल कक्षा में।
आ बैठ गए तीनों परीक्षा में।।
प्रथम श्रेणी में पास किया एक
दूजा द्वितीय दर्जे को पाया।
तीजा तेतीस फीसदी लाकर
तीजे दर्जे तीजे स्थान पे आया।।
अफसोस कि तीनों आखिर
छात्रवृत्ति से कुछ दूर रह गए।
बासठ पर पहला अटका है
छप्पन पर मगरुर रह गए।।
सोच में देख दोनों को तीजा
लगा ठहाका जोर से बोला।
मिले वजीफा पच्चासी पर
फिर क्या मुश्किल है भोला।।
बारी -बारी तुम दोनों से
गठबंधन आ मैं करता हूँ।
छःछः मास तुम दोनों संग
निज लब्धांक शेयर करता हूँ।।
पौ बारह में रहेंगे तीनों
आखिर इसी आधार पर।
लोकतंत्र सरकार यहाँ
जब बनती इसी आधार पर।।
हमें तो चाहिए कुछ पैसे
आखिर पढ़ने के खातिर।
इनको तो सबकुछ मिलता है
वेतन पेंशन सुविधा आखिर।।

Comments

2 responses to “गठबंधन”

  1. Geeta kumari

    बहुत खूब , सरकार के सिस्टम का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई कवि विनय शास्त्री जी की बहुत ही सुन्दर और सटीक व्यंग्यात्मक रचना। लाजवाब अभिव्यक्ति

  2. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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