गमों की नुमाइश

जरूरी नहीं हम अपने
गमों की नुमाइश करें
जो दिल में है
वो जग जाहिर करें
जिसे समझना है मेरी तकलीफों को
वो यूँ ही समझ सकता है
मापने के लिए मेरा दर्द
मेरी कविताएं पढ़ सकता है|

Comments

8 responses to “गमों की नुमाइश”

  1. Geeta kumari

    बहुत सुंदर कविता है प्रज्ञा, Very True lines.

  2. Satish Pandey

    कवि प्रज्ञा जी द्वारा बहुत ही खूबसूरती से कविता की महत्ता पर प्रकाश डाला गया है। यदि सहृदय के दर्द की अनुभूति उसकी कविता से ही हो जाती है। सुन्दर अभिव्यक्ति

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