दर्द के रिश्ते यूँ ही
नहीं निभाये जाते
मुस्कुराना पड़ता है
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गहरे जख्म खाने के बाद
दिल में लिपटे रहते हैं गम
झूँठी हँसी दिखानी पड़ती है
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चलना पड़ता है राह पर
ठोकर खाने के बाद
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चिठ्ठियाँ लिखनी पड़ती हैं
दिल के कागज़ पर
जलाई जाती हैं दिल दुखाने के बाद
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रात भर रोती है ‘प्रज्ञा’
जिसे याद करके
भूलना पड़ता है सुबह
होने के बाद
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