गाऊँ गीत मनाऊँ होली
खुशी मनाऊँ मन ही मन
रंग की रौनक जहाँ तहाँ हो
खूब सजाऊँ अपना तन।
लाल व पीले, हरे, गुलाबी
सारे रंग उड़ाऊँ मैं,
खुद का चोला खुद ही रंग लूँ
मन से तन को भिगाऊँ मैं।
बनकर खूब रंगीन सा पुतला
होली आज मनाऊँ मैं।
जो आये रंगों को लेकर
उसको खूब रिझाऊं मैं।
गाऊँ गीत मनाऊँ होली
Comments
8 responses to “गाऊँ गीत मनाऊँ होली”
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बहुत बढ़िया रचना
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बहुत खूब, बहुत खूब
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खूब सजाऊँ अपना तन।
लाल व पीले, हरे, गुलाबी
सारे रंग उड़ाऊँ मैं,
________ होली के पर्व पर रंगों में सराबोर कवि सतीश जी की बहुत ही सुंदर कविता बहुत सुंदर शिल्प और प्रवाह लिए हुए शानदार प्रस्तुति -

बहुत खूब
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अतिसुंदर रचना
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गाऊँ गीत मनाऊँ होली
खुशी मनाऊँ मन ही मन
रंग की रौनक जहाँ तहाँ हो
खूब सजाऊँ अपना तन।
लाल व पीले, हरे, गुलाबी
सारे रंग उड़ाऊँ मैं,
खुद का चोला खुद ही रंग लूँ..
कवि सतीश जी की सुंदर पंक्तियां जिनंमे होली के त्योहार की लालिमा टपक रही है
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