गीत

मेरी सांसों पे तेरा अधिकार हो गया।
लो सजना मुझे तुमसे प्यार हो गया।।
ना सूरत पसन्द, ना शोहरत पसन्द
तेरी चाहत पे ऐसा इकरार हो गया।
लो सजना मुझे तुमसे प्यार हो गया।।
मुझे चंदा-सी सूरत नहीं चाहिए।
संगमरमर की मूरत नहीं चाहिए।।
तेरी सीरत हीं तेरा सिंगार हो गया।
लो सजनी मुझे तुमसे प्यार हो गया।।
दूरियां अब अपनी खतम हो गई।
मेरा सजना मैं तेरी सनम हो गई।।
दिल की दुनिया पे अपना अधिकार हो गया।
लो सजना मुझे तुमसे प्यार हो गया।
लो सजनी मुझे तुमसे प्यार हो गया।।

Comments

7 responses to “गीत”

  1. वाह क्या बात है-
    दिल की दुनिया पे अपना अधिकार हो गया।
    लो सजना मुझे तुमसे प्यार हो गया।
    बहुत ही लाजवाब पंक्तियाँ। पूरी रचना सुमधुर है। लेखनी को प्रणाम

    1. बहुत बहुत धन्यवाद पाण्डेयजी

  2. Geeta kumari

    वाह वाह कवि के मनोभावों को व्यक्त करती हुई बहुत ही ख़ूबसूरत कविता ,सुंदर शिल्प से सुसजजित सुमधुर काव्य।अभिवादन भाई जी

    1. दिलो शुक्रिया बहिन

  3. BHARDWAJ TREKKER

    बहुत सुन्दर

  4. BHARDWAJ TREKKER

    Very nyc

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