15 Comments

  1. गुरु है , गोविंद समान ,
    कहने को अच्छा लगता है।
    मैं अध्यापक हूं निजी संस्थान का,
    दुत्कारी से डर लगता है।
    सच को उजागर करती पंक्तियाँ, बहुत खूब।

  2. मोहन जी, आप आजकल के नटखट विद्यार्थियों की शरारतों की वजह से अपना मन दुखी मत करिए।आज शिक्षक दिवस पर आप अपने शिक्षकों को,अपने गुरुओं को स्मरण कीजिए।आपका मन स्वतः ही प्रफुल्लित हो जाएगा।आपके पास टैलेंट है और शिक्षा कभी व्यर्थ नहीं जाती है।आप प्रतीक्षा कीजिए अच्छे फल भी अवश्य मिलेंगे।

    1. गीता मैम यह मेरे व्यक्तिगत विचार के साथ -साथ ,हजारों की संख्या में निजी संस्थाओं में काम कर रहे उन प्राइवेट टीचरों की व्यथा है जिन का शोषण बच्चों के अभिभावक एवं विद्यालय की मैनेजमेंट पूरी ईमानदारी के साथ करते हैं हमारा समय कुछ और था बहुत आदर सम्मान करते थे हम अपने अध्यापकों का, मगर अब तो बिल्कुल हवा बदल गई है हमारे गुरु की डांट और फटकार का ही नतीजा है कि हम काबिल बन गए
      मगर आज के समय में एक बार डांट कर देखो
      विद्यालय के बाहर पकड़ लेते हैं टीचर को। मेरे यहां ये आम बात है। और शिक्षण संस्थाओं में मेनेजमेंट के द्वारा कितना शोषण होता है सबको पता ही है
      मैम सच कड़वा होता है इसको तो पीना ही होगा!

Leave a Reply