15 Comments

  1. गागर में सागर भरने का
    काम किया अनोखा जिसने।
    उसकी महिमा कहाँ कहूँ मैं
    जीवन दिया चोखा जिसने।।
    अतिसुंदर भाव अतिसुंदर रचना ।
    शिक्षकदिवस की बधाई मेरी बहना। ।

    1. 🙏 शिक्षक दिवस की बहुत बहुत बधाई भाई जी।
      आपकी सुंदर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक स्वागत एवम् आभार

  2. बहुत ही प्रखर तरीके से सुन्दर पंक्तियाँ सजी हुई हैं। बिल्कुल सटीक लिखा है कि कोई भी ऐसी स्याही नहीं है, जिससे गुरू के सारे गुणों का वर्णन किया जा सके।
    इन पंक्तियों ने भी चार चांद लगाए हैं –
    मात – पिता इस दुनियां में लाए,
    गुरू ने यहां के तौर – तरीक़े सिखाए।
    बिना ज्ञान के क्या जीवन कुछ है?
    बिना गुरू के हम तुच्छ है।
    आपकी इस विलक्षण काव्य प्रतिभा को पुनः प्रणाम गीता जी।

    1. उत्साह – वर्धन करती हुई आपकी समीक्षा के लिए बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद। मेरी कविता के भाव समझने के लिए आपका हार्दिक स्वागत एवम् अभिनन्दन। मुझे बहुत प्रेरणा मिलती है इन समीक्षाओं से।

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