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गूँगी नहीं हूँ मैं
मुझे भी बोलना आता है।
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गुलाम हूँ अपने संस्कारों की
वर्ना मुझे भी सबक सिखाना आता है।
“गुलाम हूँ अपने संस्कारों की”….
Comments
9 responses to ““गुलाम हूँ अपने संस्कारों की”….”
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क्या बात है
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धन्यवाद आपका
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Nice
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धन्यवाद
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🙏🙏
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बहुत सुन्दर रचना
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rob the Rachna
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लाजवाब
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