गूंजती फ़िजाओ में रंग कितनें बिखरे हैं
और रेशम के धागे भी उलझे हैं,
कितनी मशरूफ है ज़िन्दगी अपनी
हम भी उलझे हैं वो भी उलझे हैं ।
गूंजती फ़िजाओ में
Comments
9 responses to “गूंजती फ़िजाओ में”
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वाह
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🙏🙏
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Nice
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🙏
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👌👌
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🙏
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👏👏
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🌹🌹
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बहुत खूब
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