8 Comments

  1. सामने “शब्द ” खड़ा मुस्कुरा रहा था,
    सच ही तो है,…..
    शब्द चाहे तो दे दे घाव
    शब्द चाहे तो मिले मिठास..
    लेखनी की इस शानदार प्रतिभा की जितनी तारीफ की जाए वह कम है। रसोई में मौजूद चीजों का मानवीकरण कर सुन्दर प्रस्तुति दी है। बहुत खूब।

  2. आपकी दी हुई सटीक और बेहतरीन समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद 🙏।बस ऐसे ही मार्ग दर्शन करते रहें ।

Leave a Reply