चंद लम्हें तेरे साथ

दो पल का साथ,
पर था तो सही।
मुस्कुराए थे हम ,
कभी तो सही ।
क्यों दोष दें तेरे जाने का,
चंद लम्हे थे न मीठे।
तेरे साथ ,पर थे तो सही।

Comments

8 responses to “चंद लम्हें तेरे साथ”

  1. Suman Kumari

    बहुत ही अच्छी कविता ।
    सरल शब्दों में अपनी व्यथा का बखान

    1. बहुत बहुत धन्यवाद सुमन जी

  2. Pratima chaudhary

    बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

    1. Pratima chaudhary

      Thank you sir

  3. सुन्दर पंक्तियाँ

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद सर

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