चलो होड़ लगाते हैं, ओ री! बारिश तेरी,
मेरे नयन झरने से।
ओह! मगर तुम हार जाओगी,
ये झरना तो पूरी रात बहता है,
और तुम बरसती हो कुछ क्षण के लिए।
चलो होड़ लगाते हैं….
Comments
14 responses to “चलो होड़ लगाते हैं….”
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shandar
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धन्यवाद शास्त्री जी
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बहुत खूब, वाह
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धन्यवाद जी
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बहुत खूब
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बहुत बहुत आभार
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आलीशान
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हार्दिक धन्यवाद
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शानदार
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बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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बेहतर खयाल
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🙏🙏
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ओह
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🙏🙏
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