चल पडे बैठकर रेल में

ये मेहनतकश हैं भारत के,
चल पडे बैठकर रेल में
इनकी दुविधा समझें हम सब,
ना लें इसको खेल में
देश बन्द हुआ, काम बन्द हुआ
पेट बन्द तो नहीं होता
काम नहीं, कमाई नहीं है,
भूखे पेट कैसे सोता.,
ना खाना है ना दूध मिला
घर में भुखा बालक रोता
भुखमरी की दुर्दशा रहे थे ये झेल
गांव इनके इनको ले चली ये रेल

Comments

11 responses to “चल पडे बैठकर रेल में”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    Nice

    1. Geeta kumari

      Thank you sir for your comment

  2. वर्तनी अशुद्ध है

    1. Geeta kumari

      Thanks🙏

    1. Geeta kumari

      Thanks🙏

  3. Geeta kumari

    Thanks 🙏

  4. Satish Pandey

    Bahut khoob

  5. Devi Kamla

    You are great

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