चाँद

रात की ठंड में
चाँद कैसे चल रहा है,
चाँद तो चाँद है
सितारों का यूँ टिमटिमाना
ठिठुरना लग रहा है।
ओढ़कर कर चादर
नीली आसमां की
सफर यह चल रहा है।

Comments

6 responses to “चाँद”

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति, keep it up

  2. शानदार लिखा है

  3. Geeta kumari

    “सितारों का यूँ टिमटिमाना ठिठुरना लग रहा है।”
    वाह चंद्रा जी सर्द रातों का बहुत ही ख़ूबसूरत चित्रण किया है आपने अपनी इन पंक्तियों में । बहुत सुंदर रचना

  4. अतीव सुंदर

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