चार राखी लाना पापा
अबकी रक्षाबन्धन में।
बड़े प्यार से बांधूगी मैं
वीरों के अभिनन्दन में।।
पहली राखी बांधूगी मैं
भारत के वीर शहीदों को।
दूसरी राखी बांधूगी मैं
शरहद के वीर सपूतों को।।
तीसरी राखी बांधूगी मैं
अपने प्यारे भ्राता को।
चौथी राखी बांधूगी मैं
अपने जन्मदाता को।।
‘विनयचंद ‘ इन चारों से
हम हैं सदा सुरक्षित।
इनका करें सम्मान सदा
रखकर इन्हें सुरक्षित।।
चार राखी लाना पापा
Comments
4 responses to “चार राखी लाना पापा”
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बहुत खूब
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मार्मिक
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उत्तम विचार👏
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बहुत बढ़िया
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