अरे भाई,चुनाव का वक़्त आया है ,
क्या करना है?
कुछ भी करो,
धर्म-धर्म खेलो,
जाति-जाति खेलो,
औरत संग अनाचार करवा लो,
हर दुखती रग पर नमक डालो,
बस चुनाव नही हारना है।
चुनाव
Comments
8 responses to “चुनाव”
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बहुत अच्छा तंज है अनु जी आजकल की राजनीति पर।बहुत ख़ूब।
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धन्यवाद जी
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कवि अनु जी की यह कविता वर्तमान राजनीतिक हालातों और उसकी बिगड़ती दिशा पर करारा प्रहार है। कवि अपने कथ्य को पाठक तक पहुचाँने सफल रही हैं। साफ सुथरी स्पष्ट भाषा और शिल्प है। वाह
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धन्यवाद जी
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अतिसुंदर भाव
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धन्यवाद जी
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सही तंज कसा है
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शुक्रिया जी
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