12 Comments

  1. ज़िन्दगी है,हर तरह के लोग होते हैं यहां
    कोई लुटाते नेह, कोई ठेस देते हैं यहां ….
    ….. वाह, बहुत सुंदर पंक्तियां है सर…..
    As usual beautifully written satish ji…. लेखनी को प्रणाम

    1. बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी, भावों को समझने और इतनी सुन्दर समीक्षा करने हेतु हार्दिक आभार। आपकी समीक्षा शक्ति अदभुत है। सादर अभिवादन।

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