चैन मिलता ही नहीं

खोजती रहती है दुनिया
चैन मिलता ही नहीं,
यह सही है वह सही है
मन कहीं टिकता नहीं।
आजकल की बात ही
कुछ अलग सी हो गई
असलियत के रंग का
खून भी दिखता नहीं।

Comments

4 responses to “चैन मिलता ही नहीं”

  1. Praduman Amit

    Wah Payday jee kaya baat kahi hai

  2. सुंदर शिल्प उम्दा भाव

  3. शानदार पंक्तियाँ

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