कितने भी जुल्म तुम कर लो,
बांध दो कितनी ही जंजीरो से
मिटा देंगे तेरी हस्ती पल भर में
जब छूटेंगे हम तीरों से
जब छूटेंगे हम तीरों से
Comments
7 responses to “जब छूटेंगे हम तीरों से”
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छोटी पर अच्छी रचना
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Thanks
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Wah
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thanks
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बहुत खूब
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shukriya
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वाह बहुत सुंदर रचना
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