आंखे हैं पर देख नहीं सकते
जुबां तो है पर कुछ कह नहीं सकते
जब से वो गये है हमारी चौकट से
न किसी को देखने की चाहत है
न गुफ़्तगु की जुस्तजु है
जब से वो गये है
Comments
8 responses to “जब से वो गये है”
-

बहुत खूब
-

सुंदर
-
सुन्दर
-
श्रृंगार के वियोग पक्ष की संवेदना सुन्दर तरीके से शब्दों में उकेरी गई है। थोड़ा चौखट में टाइपिंग मिस्टेक हुई है जो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों में हो ही जाती है। सुन्दर भाव मुखरित हुआ है।
-
Nice lines
-
👌
-
अति सुन्दर
-
Great
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.