जल्दी जल्दी में (हास्यव्यंग्य)

श्याम का समय,
बहुत जल्दी में थे वे लोग,
तेज तेज कदमों में,
अजीब सी हलचल,
चेहरे पर रोनक,
कुछ पाने की लालसा,
एक के बाद एक,
गुजर रहा था हर शख्स,
मन में मेरे भी पली जिज्ञासा ,
आखिर क्या हुआ है,
कोई अनहोनी या कोई सुखद घटना,
अरे! बहुत जतन से पता चला,
गांव से बाहर एक ठेका खुला।

Comments

12 responses to “जल्दी जल्दी में (हास्यव्यंग्य)”

  1. Prayag Dharmani

    हा हा.. ठेके के खुलने पर लोगों की प्रतिक्रिया का बहुत ही सजीव चित्रण किया है आपने

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      😊 बिल्कुल सर
      धन्यवाद

  2. Chandra Pandey

    बहुत खूब

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत हार्दिक अभिनन्दन

  3. वाह वाह, बहुत ही सुंदर लिखा है

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद

  4. क्या बात है
    काफी अच्छी है

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      सादर धन्यवाद

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      🙏

  5. Pratima chaudhary

    लोगों का शराब के प्रति इतना प्रेम
    बहुत ही सजीव चित्रण

  6. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    🙏🙏

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