कुछ दिनों से ज़िन्दगी “जादू” सी हो गई
कुछ भी काम करने से पहले धूप चाहिए
रात को तो धूप मिलती नहीं है
तो एक कप टमाटर का सूप चाहिए
काश किसी डब्बे में रख पाती इस मौसम को,
गर्मी के मौसम में यही ठंड चाहिए
लेकिन सर्दी की भी सीमा हो
पवन चले पर थोड़ा धीमा हो
खाने का तो मज़ा है
पर काम करना एक सज़ा है
सुहाती है सर्दी पर हो थोड़ी कम
चाय की चुस्कियों में मिटे सारे ग़म
_____✍️गीता
*ज़िन्दगी जादू सी*
Comments
8 responses to “*ज़िन्दगी जादू सी*”
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Very nice 👍👍👍👏👏
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Thank you very much Sandeep ji
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कुछ दिनों से ज़िन्दगी “जादू” सी हो गई
कुछ भी काम करने से पहले धूप चाहिए
रात को तो धूप मिलती नहीं है
तो एक कप टमाटर का सूप चाहिए”
साहित्यिक दृष्टि से गीता जी की अति उत्तम हास्य कविता है यह, बहुत सुन्दर पंक्तियाँ, उत्तम शिल्प-
सुंदर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद सतीश जी
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बहुत खूब
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बहुत-बहुत शुक्रिया भाई जी🙏
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वाह बहुत खूब
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धन्यवाद प्रज्ञा
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