जिंदगी बेवक्त मशरूफ रहती है

आजकल फुर्सत
नहीं होती है
जिंदगी बेवक्त मशरूफ रहती है…
त्योहार का मौसम है
मगर जाने क्यूं !
होंठों पर खामोशी पसरी रहती है…..
है चारों ओर रिश्तों का
ताना-बाना
पर दिल में मायूसी
फैली रहती है….
रात होती है जब
तो चाँद गगन में आता है
सबकी छतों पर रजत
पिघली रहती है…

Comments

9 responses to “जिंदगी बेवक्त मशरूफ रहती है”

  1. बहुत ही सुन्दर भाव पूर्ण रचना

  2. Geeta kumari

    वाह, मन के भावों को व्यक्त करती हुई बहुत सुंदर कविता, लाजवाब

  3. अत्यंत लाजवाब और बेहतरीन अभिव्यक्ति

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