जिंदगी में मुकाम और भी हैं
मंज़िल एक है पर
रास्ते और भी हैं।
कितनी छोटी है जीवन की चादर
पैर पसारने के आसमान
और भी हैं।
यूंँ नहीं बढ़ते हैं यहाँ फासले
दुश्मनी के मैदान
और भी हैं।
ये हिन्दुस्तान है यहाँ रिश्ते
निभाये जाते हैं।
रकीबों के जहान
और भी हैं।
तंज कसना ही नहीं है
हुनर अपना
पण्डितों(ज्ञानी) के रुआब
और भी हैं।
जीवन की चादर
Comments
13 responses to “जीवन की चादर”
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वाह वाह
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🙏🙏
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अतिसुंदर
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धन्यवाद
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बहुत सुंदर
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🙏
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सुन्दर रचना
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🙏
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जीवन की चादर….nice line
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🙏🙏
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धन्यवाद
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लाजवाब
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