जीवन श्लेष युक्त कविता है

जीवन श्लेष युक्त कविता है
इसको सुलझाते-सुलझाते
सारी उम्र बीत जाती है
लेकिन सुलझ नहीं पाती है।
अर्थ, रहस्य, लक्ष्य क्या इसका
है किस हेतु बना यह
या केवल है स्वप्न देखने
मिटने हेतु बना यह।
हँसना-गाना खुशी मनाना
कभी है रोना-धोना,
कभी काटना फसल स्वयं की
कभी है फिर से बोना।
चक्र चला दिन हुआ कभी तो
कभी रात फिर होना,
कभी पाप के मैल में रमना
कभी नदी में धोना।
आज नहीं तो कल सुख होगा
इसी आस में रहना,
सुख आने तक चला-चली में
बिन जाने चल देना
कल भोगूँगा सोच सोच कर
धन संचय कर लेना
लेकिन उसको भोग न पाना
बिन भोगे चल देना।
जीवन श्लेष युक्त कविता है
इसको सुलझाते-सुलझाते
सारी उम्र बीत जाती है
लेकिन सुलझ नहीं पाती है।
——- डॉ0 सतीश चंद्र पाण्डेय, चम्पावत, उत्तराखंड।

Comments

6 responses to “जीवन श्लेष युक्त कविता है”

  1. वाह बहुत लाजवाब रचना है सर आपकी। बहुत खूब

    1. Amita Gupta

      जीवन श्लेष युक्त कविता है,
      उम्दा लेखन🙏🙏

    1. Ekta Gupta

      बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

  2. vikash kumar

    Great poem

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